The Real Teacher Social Hindi Blog on HindiManch

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दोस्तों आज हम एक शिक्षक यानि गुरु के बारे में चर्चा करेंगे| हमारे जीवन में शिक्षक एक ऐसा महत्वपूर्ण इंसान होता है जो अपने ज्ञान, धैर्य और प्यार से हमारे पूरे जीवन को एक मजबूत आकार देता है। या फिर ये कह सकते है की शिक्षक ही होता है जो हमें एक सही मंज़िल की ओर इशारा करता है| हमारे लिये एक शिक्षक भगवान का भेजा हुआ एक अनमोल तोहफा है। एक शिक्षक ईश्वर की तरह है क्योंकि ईश्वर पूरे ब्रह्माण्ड का निर्माता होता है जबकि एक शिक्षक को एक अच्छे राष्ट्र का निर्माता माना जाता है। शिक्षक यानि गुरु जो एक इन्सान का सबसे प्यारा इन्सान होता है|

शिक्षक समाज में बहुत प्रतिष्ठित लोग होते हैं जो अपने जादू के माध्यम से आम लोगों की जीवन शैली और दिमागी स्तर को बढ़ाने की जिम्मेदारी उठाते हैं। अपने बच्चों के लिये माता-पिता एक शिक्षक से बहुत उम्मीद रखते हैं।

शिक्षक का अर्थ
शि – शिखर तक ले जाने वाला|
क्ष – क्षमा की भावना रखने वाला|
क – कमजोरी दूर करने वाला|
अर्थात जो हमारी हर गलती को क्षमा करने की भावना रखता है और अपनी हर कमजोरी दूर करके हमें शिखर(मंज़िल) तक ले जाता है| वही सच्चा शिक्षक(The Real Teacher) होता है|

हरेक के जीवन में शिक्षक बहुत महत्वपूर्ण इंसान होता है जो हमारे जीवन में अलग-अलग कार्य करता प्रतीत होता है। अच्छा शिक्षक हमारा एक अच्छा दोस्त भी होता है जो हमें सही रास्ता प्राप्त करने में मदद करता है। विजय और सफलता पाने के लिये जीवन में शिक्षा को सबसे शक्तिशाली हथियार के रुप में माना जाता है।

अपने देश के भविष्य और युवाओं के जीवन को बनाने और उसे आकार देने के लिये इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी और कार्य को करने के लिये शिक्षकों को दिया जाता है। शिक्षा की ओर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को शिक्षक निभाता है और बच्चों के वर्तमान और भविष्य को बनाता है। अपने पूरे जीवन भर ढेर सारे विद्यार्थियों को निर्देशित और शिक्षित करने के द्वारा अच्छे समाज का निर्माण करने में शिक्षक एक महान कार्य करता है।

जीवन में सही रास्ता चुनने के लिये शिक्षक को भगवान द्वारा धरती पर भेजा जाता है साथ ही साथ बुरी परिस्थिति में सही फैसला करने में उन्हें सक्षम बनाता है| शिक्षक बच्चों के अंदर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं एवं उनके अंदर के अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर देते हैं । बच्चे शिक्षक के समीप श्रद्धाभाव से जाते हैं ताकि वे ज्ञान के समुद्र में गोते लगा सकें ।
कहा भी गया है कि ‘ श्रद्‌धावान् लभते ज्ञानम्। ‘ अर्थात् श्रद्‌धावान् को ज्ञान प्राप्त होता है । यदि विद्‌यार्थी के अंदर श्रद्‌धा होती है तो शिक्षक उसे अपना समस्त ज्ञान देते हैं ।

कबीरदास जी कहते हैं –
गुरु कुम्हार शिष कुंभ है, गढ़ि-गढ़ि काई खोट ।
अंतर हाथ सहारि दे, बाहर मारे चोट ।।

अर्थात् गुरु कुम्हार और शिष्य घड़ा है। जिस प्रकार कुम्हार यत्न से घड़े को सुघड़ बनाता है उसी तरह गुरु भी विद्‌यार्थियों के दोषों का परिमार्जन करता है। गुरु की कठोरता बाहरी होती है, अंदर से वह दयावान ‘और हमारा शुभचिंतक होता है। गुरु हमारा हमेशा भला चाहता है।

हमारे इस हिंदी ब्लॉग के माध्यम से हम यही कहना चाहते है हमें अपने गुरु यानि शिक्षक का आदर सम्मान करना चाहिए क्योकिं हमारा जीवन गुरु के बिना अधुरा है|

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