Navodayan True Love Story

Navodayan True Love Story

नवोदय विद्यालय कागल, कोल्हापुर… नाम तो सुना ही होगा| वो भी क्या जिंदगी के पल थे जब हनी का चेहरा देखने के लिए मनी सब कुछ करने को तैयार हो जाता था| दोस्तों इस कहानी की शुरुआत(सन २००२) में तब हुई जब वो दोनों स्कूल में साथ पढ़ते थे| यह Navodayan True Love Story कहानी हनी और मनी की है जो एक ही क्लास में पढ़ते थे| कहानी लिखने की वजह बहुत ही खाश है जो आप खुद समझ जायेंगे जब पढेंगे| जिंदगी बहुत खूबसूरत है, जिसे प्यार से जिये तो खुश रहने की कोई वजह खोजने की जरुरत नहीं है| बहुत ही सच्ची कहानी है जो मेरे दिल से लिख रहा हु| जिंदगी छोटी सी है थमी-थमी सी चलती है, लेकिन लोगों की भाग-दौड़ को देखकर रफ़्तार सी लगती है|

कहानी में हनी लड़की है और मनी लड़का है जो दोनों एक ही क्लास में पढ़ते थे| हनी(लड़की) बहुत ही चंचल और बला दिखने में भी क्या खूबसूरत लड़की थी| उसकी आंखे इतनी नशीली थी की मनी(लड़का) जब भी देखता तो उसकी आँखों में डूब जाता था| दोनों ने पांचवी कक्षा पास करके छठी में प्रवेश लिया था| दोनों के घर वालो ने पढ़ाई के लिए होस्टल में एड-मिशन दिला दिया| हनी(लड़की) हसमुख चेहरे वाली थी साथ ही दिल की साफ़, जो आया बोल दिया यानी खुले विचारों वाली लड़की थी| मन में किसी प्रकार का कोई खोट नहीं रखती थी| उसे क्या पता था की इन्ही अदाओं पर मनी(लड़का) फ़िदा हो जाएगा| उसे तो यही भी नहीं पता था की प्यार क्या होता है, कैसे करते है|

मनी(लड़का) पढ़ाई में अच्छा था| वो हनी जितना ज्यादा खूबसूरत तो नहीं था लेकिन उसमे भी कुछ खाश था जो हनी(लड़की) को पसंद था तो वो था मनी का शांत स्वभाव और उसकी लिखावट| हनी(लड़की) को उसकी लिखावट बहुत अच्छी लगती थी| क्लास में जब भी लिखावट या शांत स्वभाव की बातें होती तो मनी(लड़का) का नाम पहले आता था| समय बीतता गया| मनी(लड़का) के बहुत दोस्त बन गए थे| उन सबमे हनी भी एक दोस्त बन गयी थी| क्लास में होम वर्क करने के लिए मनी(लड़का) की नोटबुक सभी लेते थे| हनी(लड़की) भी उसकी नोटबुक लिया करती थी| कभी-कभी दोनों की बातें भी होती थी| मनी(लड़का) को हनी(लड़की) की मुस्कराहट बहुत पसंद थी| उसे देखने के लिए जल्दी से क्लास में जाना, जब तक वो क्लास में हो तब तक उसका भी क्लास में उपस्थित रहना| एक मुस्कान और उसकी बातों को सुनने के लिए बहुत देर-देर तक इंतजार करता था| अब मनी(लड़का) होस्टल में रहने से ज्यादा क्लास में रहना पसंद करता था| फिर क्या था, वो हनी(लड़की) को मन ही मन चाहने लगा| उसके लिए हर वक़्त अपना होम वर्क कम्पलीट ही रखता था ताकि वो नोटबुक माँगें और उसके बहाने उससे बात हो जाए| मनी(लड़का) उसको चाहता है ये बात हनी(लड़की) को पता नहीं थी| ऐसे करते करते तीन साल निकल गए लेकिन हनी(लड़की) को इस बात की जरा भी भनक नहीं थी की वो उसको प्रेम करता है| अब वो नवमी क्लास में आ गए थे|

हमने सुना है प्यार जिंदगी में सबको होता है किसी को पहले होता है तो किसी को बाद में| इस कहानी में प्यार मनी(लड़का) को पहले हो गया था और कब हुआ ये वो भी नहीं जानता था| प्यार करने की कोई उम्र नहीं होती है| अब पता चल रहा था की वो उसके लिए क्या मायने रखती थी|

प्यार से बड़ा कोई खूबसूरत रिश्ता नहीं होता|

मनी(लड़का) अब उसके बिना रह नहीं पाता था| उसकी नशीली आँखों पर फ़िदा हो गया था| एक बार उसने उसकी बेंच पर दोनों का नाम लिख दिया| ये बात जब हनी(लड़की) को पता चली तो देखकर बहुत गुस्सा आया| फिर उसने मनी(लड़का) को ये सब करने को मना बोला| उसने बोला ऐसा क्यों किया, तू अच्छा लड़का है, इसलिए मैं तेरे से बात करती हु| तुझे ये सब करना अच्छा नहीं लगता| फिर क्या था बोल दिया मनी(लड़का) ने अपने मन की बात की वो उसे पसंद करता है| यह बात पुरे स्कूल में फैल गयी| चारों ओर उनकी ही चर्चा हो रही थी| लेकिन हनी(लड़की) नहीं चाहती थी की ये बात सब को पता चले क्योंकि हनी(लड़की) को डर था की बात घर तक न चली जाये| मनी(लड़का) भी नहीं चाहता था की ये बात घर तक पहुचे| दोस्तों ने बहुत समझाया मनी(लड़का) को की वो उसको भूल जाए लेकिन कहते है ना की “वो प्यार ही नहीं जो किसी के कहने से प्यार करना छोड़ दे|” प्यार तो अँधा होता है| जो हो जाए तो फिर किसी और की तो छोडो … वो खुद की नहीं सुनता| ऐसा मनी(लड़का) के साथ हो रहा था| फिर भी हनी(लड़की) की ख़ुशी के लिए कुछ हरकतों को बंद कर दिया| अब उनकी बात कम होने लगी थी| इधर जो हनी(लड़की) नहीं चाहती थी, वो ही मनी(लड़का) के साथ हो रहा था| मनी(लड़का) को ओर ज्यादा लगाव होने लगा था| और ज्यादा याद आने लगी थी| ऐसे चलता रहा और आ पहुचे ग्यारवी क्लास में|

मनी(लड़का) दिल से प्यार करता था| ये बात हनी को पता थी| मनी(लड़का) भी जानता था की वो भी पसंद करती है| लेकिन कभी हनी(लड़की) ने सामने से नहीं बोला था की वो भी पसंद करती है| एक बार वो दोनों शाम को अकेले मिले और सब बाते कर ली की आज के बाद मनी(लड़का) ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगा की हनी(लड़की) को कोई परेशानी हो| और ये बात मनी(लड़का) ने मान ली| माने भी क्यों नहीं , आखिर प्यार जो करता था| मनी(लड़का) ने वो सब छोड़ दिया जो पहले क्लास में किया करता था जैसे प्रेम पत्र लिखना, बेंच पर नाम लिखना, हाथ पर हनी का नाम लिखना आदि| स्कूल में प्रेमियों के नाम पर ये दोनों जाने जाते थे| हनी(लड़की) भी शायद प्यार करने लग गयी थी| लेकिन ये बात हनी(लड़की) ने अब तक मनी को बताई नहीं थी| जो भी हो लेकिन ये तो पक्का था की हनी(लड़की) नफ़रत भी नहीं करती थी मनी(लड़का) को, क्योंकि ताली दोनों हाथ से बजती है|

हनी(लड़की) की कुछ अदायें जो मनी(लड़का) को बेहद पसंद थी जैसे उसके जुल्फों का खुला रखना, कलर यूनिफार्म में देखने के लिए तो मनी(लड़का) इतना पागल हो जाता की अपना सब काम छोड़ने को तैयार हो जाता था| मनी(लड़का) अब उसका चेहरा देखे बिना रह नहीं पाता था| अब मनी(लड़का) को लगने लगा की ये बात घर पर बता देनी चाहिए की वो किसी से प्यार करता है| क्योंकि अब वो बारहवीं में आ गए थे| और हॉस्टल बारहवी तक ही था| उसके बाद वापस हनी(लड़की) का चेहरा देखने को मिलेगा या नहीं| मनी(लड़का) ने ये बातें घर पर बताई| लेकिन कुछ बात न बनी| मनी ने फिर सीधे हनी से बात कर ली की वो उसे बहुत प्यार करता है और शादी करना चाहता है| वो हमेशा उसको खुश रखेगा| वो उसके बिना नहीं रह सकता| लेकिन लेकिन…
हनी(लड़की) ने जो जवाब दिया सुनकर आप भी हैरान रह जाओगे| हनी(लड़की) रोते हुए मनी(लड़का) को बोली… (रोते हुए हनी को देखकर मनी की आखें भी भर आयी, मनी ने कभी नहीं सोचा की वो भी कभी उसके रोने का कारण बन जाएगा) तो हनी(लड़की) बोली की मैं चाहते हुए भी आपसे शादी नहीं कर सकती क्योकि हनी(लड़की) जानती थी की उसके घर वाले ऐसे प्रेम वाले रिश्ते को नहीं मानेंगे| यही भी नहीं चाहती थी की उसकी याद में मनी नाखुश रहे| वो नहीं चाहती थी की वो हर पल उसके याद में डूबा रहे| वो नहीं चाहती थी की उसकी वजह से मनी कोई ऐसा कदम उठाये की उसके परिवार वालो को ठेस पहुचे| उसने बहुत ही सोच समझ कर जवाब दिया की मैं आपसे शादी नहीं कर सकती| ये सब सुनकर मनी(लड़का) पूरी तरह से टूट गया था| बहुत रोया लेकिन कुछ नहीं कर सकता था| अब अपने प्यार की बात रखने के लिए उसने सब उसकी बातों को समझा| सब भूल जाने की कोशिश करने लगा|
विदाई समारोह चल रहा था| हनी(लड़की) को लगा की मनी(लड़का) बात करेगा क्योंकि आज लास्ट दिन जो था फिर सब अपने-अपने घर चले जायेंगे| लेकिन मनी(लड़का) वहा से कब चला गया किसी को पता नहीं चला| वो नहीं चाहता था की वापस उसकी वजह में हनी(लड़की) को रोना पड़े| मनी(लड़का) खुद भी इस दिन का सामना नहीं कर सकता था| हनी(लड़की) की आँखे बस यही इंतजार कर रही थी की वो आएगा और मिलेगा| लेकिन ज्यादा देर तक मनी(लड़का) नहीं आया तो वो भी समझ गयी की अब कभी नहीं मिलेगा वो मुझसे| हनी(लड़की) को बुरा लगा की लास्ट दिन भी नहीं मिला, लेकिन उसको ये भी पता था की इस पल का सामना मनी(लड़का) नहीं कर पायेगा|

किस्मत ने नहीं, हालात ने दूर किया!
दुनिया ने नहीं, अपनों ने मजबूर किया!!

हनी रोज अपने स्कूल की सहेलियों से बाते करती और मनी(लड़का) की बाते करती थी| दोनों के घर वालो ने सामाजिक रीती-रिवाजों के अनुसार उनका रिश्ता कर दिया| दोनों ने अपनी पढाई पूरी की| फिर भी दोनों एक-दुसरे भुला नहीं पा रहे थे| जब भी कभी स्कूल दोस्तों से उनकी बातें होती तो एक-दुसरे को याद करते थे|

किस्मत से लड़ने का ही अलग मजा है,
ये मुझे जितने नहीं देती और मैं हार मानने वाला नहीं!!

हनी मनी दोनों कभी इतने खुश नहीं थे जितने वो पहले होस्टल समय में हुआ करते थे| दोनों ही अपने-अपने रिश्ते से नाखुश थे| लेकिन पढ़े हुए थे तो अपने परिवार के खिलाप भी नहीं जा सकते थे| दोनों को मिले आठ-नौ साल हो गए थे| अब दोनों के शादी की बात चल रही थी| लेकिन उसके पहले ही हनी(लड़की) ने अपने रिश्ते से ना बोल दिया| ये बात मनी(लड़का) नहीं जानता था| दोनों का कोई मेल-मिलाप भी नहीं था| साथ ही मनी(लड़का) का भी रिश्ता टूट चुका था|
अब हनी(लड़की) से रहा नहीं गया| कैसे भी करके उसने मनी(लड़का) से संपर्क किया और अपनी सब बाते बताई जो पिछले आठ-नौ साल में हुई थी| अब उसने अपने मन की सब बात मनी(लड़का) को बोल दी की वो उससे कितना प्यार करती थी| कुछ मजबूरिया थी जो ऐसा कदम उठाने नहीं दे रही थी| दोनों ने मिलने का प्लान बनाया और मिलकर एक बहुत ही खूबसूरत फैसला लिया| दोनों ने शादी करने का फैसला ले लिया था| अब हनी(लड़की) ने सभी बातें अपने घर वालो को भी बता दी| एक बार तो सभी सुनकर हक्का-बक्का रह गए लेकिन फिर समझाने के बाद वो राजी हो गए| ये बात मनी(लड़का) के घर वालो को पता चली| फिर आपस में बात करके हनी मनी के प्रेम को समझा| फिर जा के उन्होंने उन दोनों का प्रेम विवाह करवा दिया| अब दोनों प्रेमी बहुत खुश थे| वो कहते है ना की प्यार अगर सच्चा हो तो रंग लाती है और पूरी कायनात उनको मिलाने में जुट जाती है|

कितनी हसीन हो जाती है जिंदगी,
जब दोस्त, प्यार और हमसफ़र,
एक ही इंसान हो|

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