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हार से जीत की ओर – हिंदी ब्लॉग

प्रिय मित्रो,
लम्बे अन्तराल के बाद मुझे अपने जीवनी पर कुछ लिखने का मन कर रहा है जो आज से शायद पंद्रह साल पहले मेरे साथ हुआ और उसके बाद शायद मैंने सपने देखना ही छोड़ दिया था| क्योकिं आज जो बताने जा रहा हु शायद आपके रोंगटे खड़े कर देगी| यह मेरे जीवन की वास्तविकता है| Motivational Hindi Blog or Motivational Story in Hindi

घटना के पहले:-
मैं बहुत खुश था वो सब कहने मात्र से हासिल हो जाता और जो करना चाहता मेरे लिए बहुत आशान था| दोस्तों के साथ खेलना, उठाना, मस्ती करना सब कुछ| मेरे परिवार में मैं, मेरे पापा और मेरी मम्मी सब खुश थे| हर रोज की तरह उठाना हसना हसाना और दिन निकल जाता|
आज भी मुझे याद है हम सब हर साल की तरह आज भी कृष्ण जन्माष्टमी के मेले में जाने की तैयारी कर रहे थे| मेरे गाँव के नजदीक ही था जहाँ लगभग तीन अन्य गाँवो से भी लोग आते है| हम वहा पहुचे| हम सब ने भगवान के दर्शन किये|
घुमे, दोस्तों और हमारे सम्बन्धियों से मिले| कुछ मेरे लिए मम्मी पापा ने खिलौने भी ख़रीदे| सब ठीक चल रहा था| अचानक एक घातक मोड़ आया यानि एक घटना हुई, जिसने शायद मेरे जीवन को खोखला कर दिया|

घटना स्थल :-
शायद आपको मालूम नहीं होगा जब कोई घटना अपने साथ होने वाली हो, तो कुछ अजीब सा फील होता है और ठीक वैसा ही मेरे साथ होने लगा| मेरे पैरों में दर्द होने लगा| मन में भी कुछ हो रहा था की आज मेरे साथ कुछ गलत होने वाला है|
मटकी फोड़ का समय था| हो हल्ला चल रहा था सब उसे देखने में मस्त थे| अधिक नजदीक से देखने के लिए में ठीक ऐसी जगह पंहुचा जिसने जीवन को एक विकराल रूप दे दिया| मैं एक बड़े खम्भे के निचे खड़ा था| और कुदरत का खेल तो देखो
कुछ ही समय में वो बड़ा भारी खम्भा गिर गया और सीधा मेरे ऊपर गिरा| फिर क्या था सब लोग इधर-उधर भागने लगे| मैं निचे लेटा हुआ, सब भागने मैं लगे हुए थे और कुछ तो मेरे ऊपर से भाग रहे थे| उस समय मुझे कोई भान नहीं था मैं बेहोस हो गया था|
फिर तीन-चार लोगो ने हिम्मत दिखाई और मेरी सहायता के लिए आगे बढे| और हॉस्पिटल ले जाने के लिए गाड़ी ढूंढने लगे| कैसे भी करके हॉस्पिटल ले गए| मेरे पैर की शायद हड्डियाँ टूट चुकी थी|

मैं और हॉस्पिटल:-
जब मुझे होश आया तो मैं मेरे पैर को देख कर चिल्लाया| पैर में बहुत फेक्चर थे| पैर की हालत देख डॉक्टर भी हक्का बक्का रह गया और तुरंत बोला की इसे बढे हॉस्पिटल ले जाओ मेरे बस की बात नहीं| दर्द कम होने का इंजेक्शन दिया और वहां से हम भुज के बढे हॉस्पिटल पहुचे| एक्सरा निकला तो पता चला की अब ठीक नहीं होना था| मेरे पांव निर्जीव से हो गए थे| प्लास्टर ऑफ़ पेरिस का पट्टा किया और वहां से राजकोट के डी. के. हॉस्पिटल पहुचे| लगभग नौ से दस खून की बोतले चडाई| पैरों का सारा खून जम चूका था| राजकोट स्वामीनारायण मंदिर से कुछ लोग खून डोनेट करने के लिए आये| वो मेरे जीवन का पहला ओपरेशन था| डॉक्टर ने बेहोश का इंजेक्शन दिया| मेरा यह ओपरेशन लगभग 12 घंटे चला| मुझे 50 घंटे तक बिना खाए पिए रखा| उसके बाद थोडा पानी पिने को मिला| रात में पैरों से खून निकलने लगा और सांसे भूलने लगी|
मेरी मम्मी बहुत टेंशन में थी| सब भाग रहे थे| कोई मुह पर पानी छिडके, तो कोई हाथ और पैर हिलाए ताकि में होश में आ जाऊ| डॉक्टर ने रात 12 बजे मुझे इलेक्ट्रिकल झटके दिए| जब मुझे होश आया तो में ऑक्सीजन पर था| मेरे पैर का बहुत बार ओपरेशन हुआ लेकिन कामियाब न हुआ|
मैंने भी हार मान ली थी की अब मेरी जिंदगी कोई काम की नहीं| मानो मेरी जिंदगी नरक सी बन गयी थी| मैं पैर के दर्द से थक चूका था अब बस मौत का इंतजार था| रात भर सो नहीं पाता था| दर रोज खून की 2 बोतले चढाई जाती|

डॉक्टर का फाइनल, पैर को काटना:-
बहुत कोशिश के बाद भी सफलता हासिल ना हुई तो डॉक्टर ने मेरे घर वालो से बात की और पैर को काटना पड़ा| मुझे वापस बेहोश कर दिया और जब होश आया तो मेरा एक पैर नहीं था| मैं अपाहिज हो चूका था| मुझे बहुत दर्द हुआ| शायद मुझे पूछते तो में पैर काटने की परमिशन नहीं देता|
मुझे लग रहा था की इससे अच्छा होता अगर मौत आ जाती| लेकिन जिंदगी कुछ और ही चाहती थी| अब और क्या बताऊ सब ख़तम हो गया था| रोज डॉक्टर का आना और पैर को लेके सर्चा| धीरे-धीरे मुझे बिन पैर रहने की आदत सी लग गयी थी| ऐसा ही चलता रहा करीब 2007 तक|

मैं और मेरा स्कूल:-
मैं रोज तो नहीं लेकिन एग्जाम देने जाया करता था| पढाई में ज्यादा ध्यान तो नहीं दे पा रहा था लेकिन उसके अलावा कोई दूसरा रास्ता भी नहीं था| 2008 के बाद भी कभी कभी चेकअप के लिए हॉस्पिटल जाना पडता था|
मैंने धीरे-धीरे पढाई में ज्यादा ध्यान दिया ताकि जीवन में कुछ कर पाऊ| मेरे घर वालो ने भी मुझे हौसला दिया| अच्छी पढाई ने मुझे कई सारे अवार्ड भी दिलाये| मैंने MCA की पढाई भी अच्छे मार्क्स से पास की| और मेरा एक सपना बन गया की एक दिन सॉफ्टवेर में काम करूँगा| सपना पूरा करने के लिए मैंने बहुत पापड़ बेले|

सॉफ्टवेर कंपनी में जॉब:-
मेरे पैर ना होने की वजह से 16 कंपनियो ने मुझे रिजेक्ट किया| लेकिन धन्यवाद देता हु उन सभी कंपनी को जिन्होंने मुझे रिजेक्ट किया क्योकिं जैसे में रिजेक्ट होता और ज्यादा तैयारी करता| मैं और अधिक सीखता गया और मेरा कॉन्फिडेंस लेवल बढता गया|
2014 में अहमदाबाद आया| मेरा पहला इंटरव्यू अहमदाबाद की टॉप कंपनी में दिया जो एक रिफरेन्स से था लेकिन CEO रिलेटिव होते हुए भी मुझे सेलेक्ट नहीं किया| उन्होंने दो घंटे तक इंटरव्यू लिया और मुझे पैर के बारे में पुच कर और अधिक टॉर्चर किया|
अंत में रिजेक्ट कर दिया| पहली बार मुझे पैर नहीं होने का अहसास हुआ| मैं छुपके से बहुत रोया की मेरे पैर ना होने से मुझे रिजेक्ट कर दिया| फिर भी हिम्मत नहीं हारी| मेरे परिवार वालों को धन्यवाद देता हु की उन्होंने मुझे हर बार आगे बढ़ने के लिए मोटीवेट यानि प्रेरित किया|
आज मैं एक सॉफ्टवेर कंपनी में काम करता हु| और यह अहमदाबाद की टॉप पांच में आती है|

Navin Bhudiya - Motivational Hindi Blog
Navin Bhudiya

दोस्तों ये कहानी आप तक पहुचाने का मकसद इतना ही है की एक इन्सान अपनी जिंदगी में सब कुछ हासिल कर सकता है सब उसमे कुछ करने का ज़ज्बा होना चाहिए| हर एक व्यक्ति जो चाहे वो पा सकता है चाहे वो अपाहिज ही क्यों न हो|

इस ब्लॉग को इतना शेयर और लाइक करों की मेरे जैसे लोग जिन्होंने हार मान ली है वो प्रेरित हो जाये और कुछ जीवन में करने का सोचे| साथ ही हिंदी मंच को धन्यवाद देता हु की मेरी बात को लोगो तक पहुचाने में मदद दी|

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ज़ज्बा हो तो ऐसा

8 thoughts on “हार से जीत की ओर – हिंदी ब्लॉग”

  1. Good navin i wish. u will Be make good level which give inspiration thousands of people who are loss their hope.when i talk about u with my groups that time i am also proud for my self because you are my best roompartnar so that i closely seen you.

  2. ऊचा उडने का होंसला होना चाहिए पंखो से कुछ नहि होता ”
    બસ આ કહાવત નુ અચુક ઉદારણ એટલે નવિન ભુડીયા … વંદન તારા ઊંચા હોંસલા ને

  3. Navin I knew him personally.
    He is always live his life to his fullest potential.
    I love his spirit.
    He never show his problems.
    He is always motivational.
    Salute your courage.
    Thank You for sharing your inspirational story with us.
    Regards

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