Kaisa Ho Manzil Ka Rasta? - Social Hindi Blog

Kaisa Ho Manzil Ka Rasta? – Social Hindi Blog

मनुष्य यानि हम, जो इस धरती पर एकमात्र ऐसा प्राणी है जो सोच सकता है समझ सकता है और अपने लिए या दूसरो के लिए निर्णय ले सकता है, अपनी बेहतर ज़िंदगी के लिए सपने देख सकता है और अपनी मंजिल तक पहुचने के लिए खुद रास्ता बना सकता है | रास्ते मंज़िल का निशां होते हैं। आमतौर पर हम अपनी ज़िन्दगी का रास्ता अपनी जरूरतों के हिसाब से बना लेते है| लेकिन सभी को अपनी मंजिल इतनी आसानी से नहीं मिल पाती| ज़िन्दगी एक ऐसे रास्ते की तरह है जिसमें जगह-जगह मोड़ हैं, रुकावटें हैं। इस रास्ते में बहुत बार गहरी खाइयां और ऊंचे पर्वत भी आ जाते हैं जिन्हें पार करना होता है, क्योंकि चलते रहना ही तो ज़िन्दगी है।

दोस्तों मंजिल के बिना जिंदगी का कोई महत्व ही नहीं है। जिस इंसान का कोई मंजिल ही नहीं वह एक मृत हृदय वाला शरीर है। इसलिए हम सभी को जीवन में अपनी मंजिल रखनी चाहिए और उस तक पहुचने के लिए एक रास्ता| बस ध्यान इतना रखना है की हमारा रास्ता कैसा हो? जिंदगी में जो चाहो हासिल कर लो, बस इतना ख्याल रखना की आप की मंजिल का रास्ता लोगो के दिलो को तोड़ता हुआ न निकले|

बेशक मंजिल तक पहुंचने का रास्ता बहुत कठिन होता है| मगर ये भी बात सही है कि बिना संघर्ष किये कोई चीज नहीँ मिलती और अगर मिल भी जाए तो वो मजा नहीँ आता| आप जो भी मंजिल चुनो वो सकारात्मक हो, संसार के हित मेँ हो, हर प्रकार से सही हो| क्यूंकि यदि मंजिल सही होगी तभी हम सही मार्ग की ओर बढ पाएंगे |

जब हम चलते हैं तो मंज़िल को अपने सामने रख कर ही चलते हैं लेकिन मंज़िल हर किसी का मुक़द्दर कहां होती है। हर किसी से वक़्त वफ़ा कहां करता है। कइयों का सफ़र रास्ते में ही समाप्तस हो जाता है लेकिन कम से कम मंज़िल के इंतज़ार का सुखद एहसास तो उन्होंने किया ही होता है। जो घर से चले ही नहीं वो तो कोई ख़्वाब भी नहीं सजा पाते, वो इन खूबसूरत एहसासों से दूर ही रह जाते हैं।

मंज़िल मिले न मिले, ख़्वाब ज़रूर सजाना। जिस दिन तुमने सपने देखना छोड़ दिया, ज़िन्दगी सज़ा हो जाएगी। तुम ख़्वाब सजाते हुए चलते जाओ, गर मंज़िल पर न भी पहुंच पाए तो दूसरों के लिए रास्ते तो बना ही दोगे। ये हासिल भी कोई कम तो नहीं।|

हमे अपने परिवार, दोस्तो की मदद लेने से भी चूकना नही चाहिए और ना ही कभी उनकी मदद करने से पीछे हटना चाहिए। हमें अपनी हर समस्या पर एक बार नहीं बल्कि बहुत बार सोचना चाहिए कि कोई ऐसी राह निकल जाए जिससे कि हम आसानी से समस्या की गुत्थी को सुलझा सकें |

कोशिश करो की कोई हम से न रूठे!
जिन्दगी में अपनों का साथ न छूटे!
रिश्ते कोई भी हो उसे ऐसे निभाओ!
कि उस रिश्ते की डोर ज़िन्दगी भर न छूटे!

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