Jajba Ho To Aisa - Motivational Hindi Blog

Jajba Ho To Aisa – Motivational Hindi Blog

दोस्तों कहने को तो यह एक कहानी है Hindi Motivational Blog लेकिन इस कहानी ने मुझे बहुत कुछ दिया है| ये कहानी कोई मन-गणत कहानी नहीं है| यह एक वास्तविक कहानी है जो मुझे लगता है आपको भी एक बार जरुर पढना चाहिए| यह Hindi Motivational Blogकहानी 1938 की केरली नामक एक व्यक्ति की है जो एक बहुत अच्छा शूटर था| उस देश में जितनी भी नेशनल चैंपियनशिप हुई थी उसे वो सब जीत छुका था| और सबको विश्वास था की 1940 में जो चैंपियनशिप होगी उसे केरली ही जीतेगा| उसे ही गोल्ड मैडल मिलेगा| साथ ही उसने उसके लिए सालो से ट्रेनिंग कर रखी थी| उसका एक ही सपना था, उसका एक ही फोकस था की उसका ये हाथ दुनिया का सबसे अच्छा हाथ बने| उसने उसे बेस्ट हाथ बना भी लिया था बस दो साल का फर्क था वो था नेशनल चैंपियनशिप जीत कर दुनिया के सामने लाने का|

1938 में एक आर्मी का ट्रेनिंग कैंप चल रहा था क्योकिं वो आर्मी में था| लेकिन उसके साथ एक दुर्घटना हो गयी| उस घटना में उसका वो हाथ चला गया जिसके लिए उसने दिन-रात मेहनत कर रखी थी और उसे दुनिया का बेस्ट हाथ जो बनाना था| जो उसका सपना था, जो उसका फोकस था वो सब डूब गया| सब पानी में बह गया|

दोस्तों वो टूट छुका था| अब उसके पास केवल दो रास्तें बचे थे पहला तो ये की वो बाकि की जिंदगी भी रोता रहे और कही जाकर छुप जाये और दूसरा रास्ता ये था की जो अपना लक्ष्य था जिस पर उसने फोकस किया था जिसके लिए उसने मेहनत की थी बस उसको पकड़ कर रखे| उसने दूसरा रास्ता चुना और उसने फोकस किया उसपे नहीं, जो चला गया था बल्कि उस पर जो उसके पास था और वो था उसका दूसरा हाथ| एक ऐसा हाथ जिससे वो सही से लिख भी नहीं सकता है| एक महीने तक उसके हाथ का इलाज चला और सही एक महीने बाद उसने अपनी ट्रेनिंग चालू कर दी| ट्रेनिंग के एक साल बाद यानि १९३९ में वो वापिस आया| हंगरी में नेशनल चैंपियनशिप हो रही थी जहा बहुत सारे पिस्टल शूटर आये हुए थे| उन्होंने जाकर उसको बधाई दी और कहा की ये होता है जज़्बा जो इतना सब कुछ होने के बाद भी हमारा होंसला बढ़ाने और देखने यहाँ आये है| किसी को कोई मालूम नहीं था की वो पिछले एक साल से तैयारी कर रहा था| … उसने जवाब जो दिया वो ये था की मैं यहाँ कोई देखने नहीं आया और न ही तुम्हारा होंसला बढ़ाने आया हु| उसने कहा मैं तुम्हारे साथ लड़ने आया हु| तैयार हो जाओ| और फिर चैंपियनशिप चालू हुई| वहा सब शूट कर रहे थे अपने बेस्ट हाथ से और केरली अपने दुसरे हाथ से| और जीता कौन? केरली|

लेकिन वो यहाँ रुकता नहीं है| उसका लक्ष्य साफ था की उस दुसरे हाथ को दुनिया का बेस्ट हाथ बनाना था| उसने अपना सारा फोकस डाला 1940 पर जिसमे ओलंपिक्स होने वाले थे| लेकिन वर्ल्ड वॉर की वजह से ओलंपिक्स कैंसिल हो गए| लेकिन उसने अपना मनोबल कम होने नहीं दिया| उसने अपना सारा फोकस डाला 1944 के ओलंपिक्स पर| लेकिन एक बार फिर से वर्ल्ड वॉर की वजह से कैंसिल हो गए| फिर भी वो पीछे नहीं हटा| उसने अपनी तैयारी चालू रखी 1948 के लिए जो ओलंपिक्स होने वाले थे| 1948 के ओलंपिक्स चालू हुआ तब उसकी आयु हो गयी थी 38 साल| इस आयु में वो अब मुकाबला कर रहा था जवान लोगो के साथ जिनकी आयु होगी 20-25 साल| बहुत मुश्किल होता है उनके साथ मुकाबला करना लेकिन उसकी डिक्शनरी में ऐसा कोई शब्द था ही नहीं| और वो गया| दुनिया के वो सभी बेस्ट शूटर जो अपने बेस्ट हाथ से मुकाबला कर रहे थे और वो कर रहा था अपने दुसरे हाथ से| फिर क्या हुआ जानते हो….केरली जीत गया| लेकिन बात अब भी ख़तम नहीं हुई उसने अपना टारगेट, अपना लक्ष्य बनाया 1952 के ओलंपिक्स पर| दुबारा मुकाबला किया और इस बार भी गोल्ड मैडल कौन जीता? केरली| और इस बार उसने पूरी की पूरी इतिहास को बदल कर रख दिया| इस पिस्टल शूटर में इससे पहले किसी ने भी लगातार दो बार गोल्ड मैडल नहीं जीते था|

दोस्तों बहुत ऐसे लोग होते है जो सफलता न मिलने पर कोई न कोई बहाना बना लेते है की इस वजह से मैं नहीं कर पाया या और कोई बहाना| लेकिन केरली एक ऐसा सफल व्यक्ति था जिसके पास केवल एक वजह थी ये सब करने के लिए …. और वो थी दुनिया का बेस्ट शूटर हाथ बनाना जो उसका दूसरा हाथ था| दोस्तों ये होता है जज़्बा| अगर हम किसी को पाना चाहते है और करना चाहते है तो बस अपने अन्दर एक जज़्बा होना चाहिए जो केरली में था|

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