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बोझ… कहानी जो दिल को छू ले|

दोस्तों हम अपने समाज में या कही ओर जगह देखते है की माँ बाप और उनके बेटे के बिच लड़ाई झगड़े होते है या माँ बाप अपने बच्चों से अलग घर में रहते है या फिर और कोई कारण हो सकता है जिससे बच्चों को अपने माँ बाप बोझ लगने लगते है| आप भी इस ब्लॉग The burden social Hindi blog which touches the heart को पढ़े और जाने की वास्तव में बोझ कौन होता है|

आज पिताजी गाँव से अचानक घर आ पहुचे| मैं तो उन्हें देख कर चौंक ही गया| महीने के आखरी दिन चल रहे है और हाथ भी बहुत तंग है| पापा न जाने क्या मांग बेठे| दरवाजे के बाहर खड़े पापा को देखकर घर के अन्दर बुलाया| आखों में देखकर तो ऐसा लग रहा था जैसे कुछ लेने आये हो| मेरी बीबी रसोई से बाहर आयी| वो भी यही सोच रही थी की पापा को पैसो की जरुरत आ पड़ी है इसलिए आ गए यहाँ मांगने| यही नहीं उसके विचार बहुत कुछ सोच रहे थे| वो तो यही सोचती की बिना काम के यहाँ भला कौन आएगा| बस मुसीबत आती है तो बेटा याद आता है| पापा ने भी बहु की आँखों में कुछ ऐसा ही महसूस किया लेकिन कुछ बोले नहीं| सोच कर आये थे की जाते ही बहु पैरों की छू कर आशीर्वाद लेगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ| नजरिया कुछ बदल सा गया था|

The burden Social Hindi blog which touches the heart
The burden Social Hindi blog which touches the heart

पापा थक कर आये थे वो हाथ मुह धोने गए तभी बेटा और बहु दुसरे कमरे में मिले और बाते करने लगे की इस बार लगता है पापा को पैसों की अधिक जरुरत पड़ी होगी| बेटा भी सोचने लगा घर का खर्चा भी चलाना है बीबी के दवाइयां भी लानी है| साथ ही अगले महीने बेटे का जन्मदिवस भी आ रहा है| तब उसे भी कपडे और जूते दिलवाने है| इतना सब कैसे संभालूँगा| पापा को भी अभी आना था| ऐसे विचार बेटे के मन को खाये जा रहे थे| बहु ने पापा के लिए खाना परोसा| बहु भी कुछ ऐसा ही सोच रही थी की कब खाना खाए और यहाँ से निकले|

पापा खाने बेठे और बेटा उनके सामने| फिर क्या था… बेटा सोच रहा था की आज की शांति कुछ अजीब सी लग रही है| पत्नी की नज़र भी दिल को चुभ रही है| पापा आराम से खाना खा रहे है और मेरी घबराहट बढती जा रही है| बेटा यही सोच रहा था की आज क्या मांगने वाले है| पापा ने खाना खाया और बोले| बेटा सुनो.. लेकिन बेटे का ध्यान कही ओर ही था| फिर से पापा ने बुलाया बेटा सुनो… दो-तीन बार बुलाने के बाद बेटे का ध्यान पापा की ओर गया| पापा ने अपने बेटे को पास में बेठने को बोला| मैं न चाहते हुये भी उनके पास जा कर बैठना पड़ा| मेरे दिमाग में यही चल रहा था की हो न हो पापा जरुर आर्थिक समस्या लेके ही आये होंगे| पापा ने अपने बेटे को कुछ इस प्रकार बोलना चालू किया की “खेतों के काम में घडी भर की फुर्सत नहीं मिलती| इस वक्त काम का बहुत जोर है| रात की गाडी से वापस चला जाऊंगा| तीन महीने से तुम्हारा कोई फोन नहीं आया लेकिन कोई बात नहीं| मैं जानता हूँ तुम जब बहुत परेशान रहते हो तभी ऐसा करते हो|” पापा ने हाथ अपनी जेब में डाला और पैसों की गड्डी निकाली| पैसों की गड्डी पापा ने मेरे हाथों में थामी| एक बार तो मैं भी मना कर रहा था लेकिन पापा ने बोलने से पहले ही मुझे रख लेने को कहा और बोले की तुझे पैसों की जरुरत है| ये पैसें तेरे काम आयेंगे| पापा ने यही भी बोला की इस बार धान की फसल अच्छी हुई है| और गावं में कोई समस्यां भी नहीं है| तुम बहुत कमजोर लग रहे हो| सही से खाया पिया करों| यही नहीं उन्होंने यही भी कहा की बहु का भी ध्यान रखा करों|

मेरी आँखे नम सी गयी थी मैं सोच रहा था की पापा मेरे परिवार के बार में कितना सोचते है| और एक मैं हु जो उनके आने पर क्या क्या सोच रहा था| मुझे तरस आने लगा अपनी इस सोच पर| उस दिन वास्तव में मुझे लगा की माँ बाप की जगह इस धरती पर कोई नहीं ले सकता| माँ बाप ही भगवान होते है| जब मैंने पापा की आँखों से आखें मिलाकर बात की तब पापा को पता नहीं क्या लगा ऐसा की उन्होंने वो पैसे लेके मेरी जेब में डाल दिए और बोले रख ले, रख ले|

दरवाजे की पास खड़ी बहु भी सोच रही थी की कभी कभी हमारे समझने में बहुत बड़ी गलती हो जाती है| माँ बाप कभी गलत नहीं होते| आज भी मुझे याद है पापा मुझे स्कूल भेजने से पहले मेरी जेब में अठन्नी डाल लिया करते थे| तब मेरी नजरे आज की तरह झुकी हुई नहीं हुआ करती थी|

दोस्तों इस ब्लॉग का शीर्षक यही है की “माँ बाप बच्चों पर बोझ हो सकते है, पर बच्चें माँ बाप पर कभी बोझ नहीं हो सकते|

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3 thoughts on “बोझ… कहानी जो दिल को छू ले|”

  1. बहुत ही बढ़िया article है ….. ऐसे ही लिखते रहिये और मार्गदर्शन करते रहिये ….. शेयर करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। 🙂 🙂

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