Bhagya Ke Vidhata Kaun? - Social Hindi Blog

Bhagya Ke Vidhata Kaun? – Social Hindi Blog

अब आपके सामने है दुनिया का वो सच जो आप शायद नहीं जानते है| आज भी लोग सोचते है की जब इंसान पैदा होता है तो अपने किस्मत साथ लेकर आता है लेकिन सच यह नहीं है| आपको भी लगता होगा की ये क्या बकवास है लेकिन यही सच है| मैं कहता हु की आपके भाग्य की कलम आपके पास है और आप ही अपने भाग्य के विधाता है| हमारे Bhagya Ke Vidhata Kaun? – Social Hindi Blog को पढ़े और जाने की अगर हम हमारे भाग्य लेके नहीं आते है उन्हें हम ही बनाते है तो ऐसा क्या है? या ऐसी कौनसी कलम हमारे पास है? जो हमारे भाग्य लिखती है| शायद आप भी मान जायेंगे की सही में हम अपने किस्मत लेकर नहीं आते जबकि इस दुनिया में आकर अपने किस्मत बनाते है|

दुनिया बहुत बड़ी है यहाँ करोडो लोग अपने अपने तरीको से जीते है और अपनी मंजिल को एक नया रास्ता देते है जिसमे से कुछ के सही साबित होते है तो कोई रास्ता भटक जाता है| रास्ता भटकने के बाद बहुत ऐसे लोग भी है जो कहते है की मेरी किस्मत में यह लिखा ही नहीं था| और भगवान को गलत ठहराते है| लेकिन ऐसा बिलकुल भी नहीं है| मैं किसी ओर के नहीं बल्कि अपने विचार बताना चाहूँगा जो शायद आपके विचार से मिलते जुलते हो| ये मेरे अपने विचार है की जब हम पैदा होते है तो हमारे पास होता है सिर्फ एक खोखला शरीर| जिसको ये भी मालूम नहीं होता की उसका नाम क्या है न ही उसकी कोई अपनी मंजिल होती है| फिर भी लोगो के मुह से मैंने बहुत बार सुना है की जो किस्मत में होता है वो ही हमारे साथ होता है और वो ही हम बनते है| मैंने कुछ लोगो को मेरी राय बताना भी चाहा लेकिन बहुत लोग सुनने को भी राजी नहीं थे| शायद उसका कारण ये भी हो सकता है की उन्होंने ऐसा कभी होते हुए देखा न हो या हो सकता है आज भी वो अंधविश्वास में जी रहे हो? इसके आलावा यही भी हो सकता है वो किसी और के कहे हुए रास्ते पर चल रहे हो या और कोई कारण| लेकिन मेरा कहना यही है की हम अपना जीवन अपने तरीके से जी सकते है जो हम चाहे वो कर सकते है जो हम चाहे वो बन सकते है बस ये सब करने के लिए होना चाहिए तो वो है अपने विचार|

आपके विचार क्या कर सकते है मैं आपको एक उदाहरण के माध्यम से बताना चाहूँगा की मोरिस इ नामक व्यक्ति जो मार्च 1981 में विमान दुर्घटना ने उनकी जिंदगी को पूरी तरह बदल कर रख दी थी| उन्हें लकुये ही हालत में अस्पताल लाया गया उनकी रीड की हड्डी बुरी तरह से कुचल गयी थी न वो कुछ खा सकते थे न ही सांसे ले सकते थे| वो सिर्फ अपनी पलके झपका सकते थे| डॉक्टरों ने भी कह दिया था की वो जिंदगी भर बेजान सा रहेंगे| बस पलके ही झपका सकेंगे| लेकिन ये उनकी सोच थी जिससे मोरिस को कोई फरक नहीं पड़ा| क्योकि की असल में बात कुछ और थी वो थी की मोरिस क्या सोचते है| वो अभी भी एक आम आदमी की तरह सोचते थे जो उस अस्पताल से चल कर निकलेगा| उनका केवल दिमाग काम कर रहा था जो सकारात्मक विचारो से भरा हुआ था| अगर आपके विचार नेक है आपका दिमाग आपके साथ है तो आप चीजो को फिर से समेट सकते है| डॉक्टरों ने तो यह भी कहा की वो फिर कभी खुद साँस नहीं ले पाएंगे| लेकिन उनके अन्दर से एक आवाज कहती की एक गहरी साँस लो| और नतीजा अच्छा ही हुआ की वो खुद साँस लेने के काबिल हो गये| डॉक्टर खुद भी ये समझ नहीं पा रहे थे की कैसे हुआ ये सब| क्योंकि मोरिस ने कोई ऐसा विचार अपने दिमाग में नहीं आने दिया जो ऊनके लक्ष्य को दूर कर सके| उन्होंने ठान लिया था की क्रिस्मस के दिन वो यहाँ से खुद अपने पैरों से चलकर जायेंगे| और यही उनका लक्ष्य था| और ठीक आठ महीने बाद वो खुद अपने पैरो पर चलकर अस्पताल से बाहर निकले| उन्होंने तो कहा था की ये ना मुनकिन है लेकिन वो ठीक हो गए| और निकलने के बाद जब पूछा गया तो उन्होंने साफ शब्दों में कहा की इंसान वही बनता है जो वो सोचता है|

हम विचारों से घिरे हुए है और हमारे दिमाग में जो विचार आते है वो ही हम करते है| ये विचार ही हमारे जीवन के रास्ते बनाते है और वो ही रास्ते के जरिये हम अपने जीवन में कुछ बन जाते है या कुछ हासिल करते है| आपके अच्छे विचार है तो आप अच्छे रास्ते पकड़ लेते है जो एक अच्छा आदमी बनता है| यही सत्य है| आप क्या बनोगें ये आप खुद लिखते है आपके विचार निर्धारित करते है न की आपकी किस्मत| तो आप अपने किस्मत के भरोसे न रहे और न ही ये सोचे की आपके साथ कुछ ठीक नहीं होगा| हमेशा अपने विचार सकारात्मक हो और अच्छे हो ताकि हमारा रास्ता साफ और सरल दिखे|

ये ब्लॉग लिखने का कारण यही है की मैं अपनी बात, अपने विचार आप तक पहुचाना चाहता हूँ| दोस्तों आपको हमारे ब्लॉग पसंद आये तो एक बार जरुर लाइक और शेयर करे| आप भी अपनी कोई बात या ऐसे विचार जो आम लोगो तक पहुचना चाहते है तो ईमेल के माध्यम से हमें संपर्क करे| हमें आपके विचार पसंद आने पर हम आपके विचार ब्लॉग के जरिये लोगो तक जरुर पहुचाएंगे|

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